तो सत्तमम्मि मासे उप्पलणालसरिसी हवइ णाही ।
तत्तो पभूदि पाए वमियं तं आहारेदि णाहीए॥1023॥
कमल-नाल सम नाभि बनती मास सातवें में शिशु की ।
वमन किया आहार प्राप्त करता शिशु उस नाभि से ही॥1023॥
अन्वयार्थ : गर्भ में रहने वाला जन आहार करता है । और छह महीने बाद सप्तम मास में कमल की नाली समान नाभि होती है, उस नाभि की नाली से महान मलिन वमन और अपक्क मल, उसका आहार करता है ।

  सदासुखदासजी