सत्त तयाओ कालेज्जयाणि सत्तेव होंति देहम्मि ।
देहम्मि रोमकोडीण होंति असीदि सदसहस्सा॥1036॥
सत्त तयाआि कालज्जियोण सत्तवि होंेत दहिम्मि ।
दहिम्मि रामिकाडिीण होंेत असीेद सदसहस्सा॥1036॥

  सदासुखदासजी