ग्रन्थ
001 - समस्त मतों के सिद्धान्तों का ज्ञान
002 - आप्त स्वरूप की मीमांसा
003 - आगम और तत्त्व की मीमांसा
004 - मूढ़ता का निषेध
005 - सम्यग्दर्शन के दोष
006 - जिनदत्त और राजा पद्मरथ के प्रतिज्ञा निर्वाह का साहस
007 - निःशंकित तत्त्व
008 - निःकांक्षित तत्त्व
009 - निर्विचिकित्सा अङ्ग
010 - भव्यसेन मुनि की दुश्चेष्टा
011 - अमूढ़ता अंग
013 - वारिषेणकुमार का प्रव्रज्याव्रजन
014 - स्थितिकरण
015 - वज्रकुमार का विद्याधर से समागम
016 - वज्रकुमार द्वारा तप ग्रहण
017 - बुद्धदासी द्वारा पूतिकवाहन का वरण
018 - प्रभावना अंग
019 - बलि को देशनिर्वासन
020 - वात्सल्य अंग
021 - रत्नत्रय का स्वरूप
022 - मद्य के दोष
023 - मद्यत्याग के गुण
024 - मांस की इच्छा मात्र करने का फल
025 - मांस त्याग का फल
026 - अहिंसा का फल
027 - चोरी का फल
028 - सुलसा का सगर के साथ संगम
029 - वसु की रसातल-प्राप्ति
030 - असत्य का फल
031 - दुराचार का फल
ग्रन्थ
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श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नम:
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श्रीमद्-भगवत्सोमदेवाचार्य-देव-प्रणीत
श्री
उपासकाध्ययन
मूल संस्कृत गाथा
आभार :
ग्रन्थ
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