जीवतत्त्वप्रदीपिका
भत्तं देवी चंदप्पह-, पडिमा तह य होदि जिणदत्तो।
सेदो दिग्घो रज्झदि, कूरोत्ति य जं हवे वयणं॥223॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका