
ओगाहणाणि ताणं, समयपबद्धाण वग्गणाणं च।
अंगुलअसंखभागा, उवरुवरिमसंखगुणहीणा॥247॥
अन्वयार्थ : इन शरीरों के समयप्रबद्ध और वर्गणाओं की अवगाहना का प्रमाण समान्य से घनांगुल के असंख्यातवें भाग है, किन्तु विशेषतया आगे-आगे के शरीरों के समयप्रबद्ध और वर्गणाओं की अवगाहना का प्रमाण क्रम से असंख्यातगुणा-असंख्यातगुणा हीन है ॥247॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका