णेवित्थी णेव पुमं, णउंसओ उहयलिंगवदिरित्तो।
इट्ठावग्गिसमाणगवेदणगरुओ कलुसचित्तो॥275॥
अन्वयार्थ : जो न स्त्री हो और न पुरुष हो ऐसे दोनों ही लिंगों से रहित जीव को नपुंसक कहते हैं। यह अवा (भट्टा) में पकती हुई इंर्ट की अग्नि के समान तीव्र कामवेदना से पीड़ित होने से प्रतिसमय कलुषितचित्त रहता है ॥275॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका