जीवतत्त्वप्रदीपिका
कोहादिकसायाणं, चउ चउदस वीस होंति पद संखा।
सत्तीलेस्साआउगबंधाबंधगदभेदेहिं॥290॥
अन्वयार्थ :
शक्ति, लेश्या तथा आयु के बंधाबंधगत भेदों की अपेक्षा से क्रोधादि कषायों के क्रम से चार, चौदह और बीस स्थान होते हैं॥290॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका