ईहणकरणेण जदा, सुणिण्णओ होदि सो अवाओ दु।
कालांतरे वि णिण्णिदवत्थुसमरणस्स कारणं तुरियं॥309॥
अन्वयार्थ : ईहा ज्ञान के अनंतर वस्तु के विशेष चिहक्ों को देखकर जो उसका विशेष निर्णय होता है, उसको अवाय कहते हैं। जैसे भाषा वेष विन्यास आदि को देखकर मयह दाक्षिणात्य ही हैङ्क इस तरह के निश्चय को अवाय कहते हैं। जिसके द्वारा निर्णीत वस्तु का कालान्तर में भी विस्मरण न हो उसको धारणाज्ञान कहते हैं ॥309॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका