दुगवारपाहुडादो, उवरिं वण्णे कमेण चउवीसे।
दुगावारपाहुडे संउड्ढे खलु होदि पाहुडयं॥342॥
अन्वयार्थ : प्राभृतप्राभृत ज्ञान के ऊपर पूर्वोक्त क्रम से एक -एक अक्षर की वृद्धि होते-होते जब चौबीस प्राभृतप्राभृत की वृद्धि हो जाय तब एक प्राभृत श्रुतज्ञान होता है। प्राभृत के पहले और प्राभृतप्राभृत के ऊपर जितने ज्ञान के विकल्प हैं वे सब ही प्राभृतप्राभृतसमास के भेद जानना। उत्कृष्ट प्राभृतप्राभृत समास के भेद में एक अक्षर की वृद्धि होने से प्राभृत ज्ञान होता है ॥342॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका