जीवतत्त्वप्रदीपिका
छस्सयपण्णासाइं चउसयपण्णास छसयपणुवीसा।
विहि लक्खेहि दु गुणिया पंचम रूऊण छज्जुदा छट्ठे॥366॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका