वग्गणरासिपमाणं, सिद्धाणंतिमपमाणमेत्तं पि।
दुगसहियपरमभेदपमाणवहाराण संवग्गो॥392॥
अन्वयार्थ : कार्मणवर्गणा का प्रमाण यद्यपि सिद्ध राशि के अनंतवें भाग है, तथापि परमावधि के भेदों में दो मिलाने से जो प्रमाण हो उतनी जगह ध्रुवहार रखकर परस्पर गुणा करने से लब्धराशिप्रमाण कार्मणवर्गणा का प्रमाण होता है ॥392॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका