देसोहिअवरदव्वं, धुवहारेणवहिदे हवे विदियं।
तदियादिवियप्पेसु वि, असंखवारो त्ति एस कमो॥394॥
अन्वयार्थ : देशावधिज्ञान का विषयभूत जघन्य द्रव्य पहले कहा था, उसको ध्रुवहार का भाग देने पर जो प्रमाण हो, वह दूसरे देशावधि के भेद का विषयभूत द्रव्य है। ऐसे ही ध्रुवहार का भाग देते-देते तीसरे, चौथे आदि भेदों का विषयभूत द्रव्य होता है। ऐसे असंख्यात बार अनुक्रम करना ॥394॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका