
सव्वंगअंगसंभवचिण्हादुप्पज्जदे जहा ओही।
मणपज्जवं च दव्वमणादो उप्पज्ज्दे णियमा॥442॥
अन्वयार्थ : जैसे पहले कहा था, भवप्रत्यय अवधिज्ञान सर्व अंग से उपजता है और गुणप्रत्यय शंखादिक चिह्नों से उपजता है; तैसे मन:पर्ययज्ञान द्रव्यमन से उपजता है। नियम से अन्य अंगों के प्रदेशों में नहीं उपजता ॥442॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका