जीवतत्त्वप्रदीपिका
चंडो ण मुचइ वेरं, भंडणसीलो य धम्मदयरहिओ।
दुट्ठो ण य एदि वसं, लक्खणमेयं तु किण्हस्स॥509॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका