जीवतत्त्वप्रदीपिका
रूसइ णिंदइ अण्णे, दूसइ बहुसो य सोयभयबहुलो।
असुयइ परिभवइ परं, पसंसये अप्पयं बहुसो॥512॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका