काऊ काऊ काऊ, णीला णीला य णीलकिण्हा य।
किण्हा य परमकिण्हा, लेस्सा पढमादिपुढवीणं॥529॥
अन्वयार्थ : पहली रत्नप्रभा पृथ्वी में कापोतलेश्या का जघन्य अंश है। दूसरी शर्कराप्रभा पृथ्वी में कापोत लेश्या का मध्यम अंश है। तीसरी बालुकाप्रभा पृथ्वी में कापोत लेश्या का उत्कृष्ट अंश और नील लेश्या का जघन्य अंश है। चौथी पंकप्रभा पृथ्वी में नील लेश्या का मध्यम अंश है। पाँचवीं धूमप्रभा में नील लेश्या का उत्कृष्ट अंश और कृष्ण लेश्या का जघन्य अंश है। छठी तमप्रभा पृथिवी में कृष्ण लेश्या का मध्यम अंश है। सातवीं महातमप्रभा पृथिवी में कृष्ण लेश्या का उत्कृष्ट अंश है ॥529॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका