जीवतत्त्वप्रदीपिका
संखेज्जासंखेज्जे गुणगारो सो दु होदि हु अणंते।
चत्तारि अगेज्जेसु वि सिद्धाणमणंतिमो भागो॥598॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका