
भासमणवग्गणादो कमेण भासा मणं च कम्मादो।
अट्ठविहकम्मदव्वं होदि त्ति जिणेहिं णिद्दिट्ठं॥608॥
अन्वयार्थ : भाषा वर्गणा के स्कंधों से चार प्रकार की भाषा होती है। मनोवर्गणा के स्कंधों से द्रव्यमन होता है। कार्मणवर्गणा के स्कंधों से आठ प्रकार का कर्म होता है, ऐसा जिनदेव ने कहा है ॥608॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका