जीवतत्त्वप्रदीपिका
जेट्ठावरबहुमज्झिम, ओगाहणगा दु चारि अट्ठेव।
जुगवं हवंति खवगा, उवसमगा अद्धमेदेसिं॥632॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका