
एक्कारसजोगाणं, पुण्णगदाणं सपुण्ण आलाओ।
मिस्सचउक्कस्स पुणो, सगएक्कअपुण्ण आलाओ॥723॥
अन्वयार्थ : पर्याप्त अवस्था में होते हैं ऐसे चार मन, चार वचन, औदारिक, वैक्रियिक, आहारक इन ग्यारह योगों का अपना-अपना एक पर्याप्त आलाप ही है। जैसे सत्य मनोयोग का सत्यमन पर्याप्त आलाप है। ऐसे सबका जानना। अवशेष रहे चार मिश्र योगों का अपना अपना एक अपर्याप्त आलाप ही है। जैसे औदारिक मिश्र के एक औदारिक मिश्र अपर्याप्त आलाप है। ऐसे सबका जानना ॥723॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका