जीवतत्त्वप्रदीपिका
001 - मंगलाचरण
002 - संक्षिप्त और मध्यम रुचि वाले शिष्य की अपेक्षा प्ररूपणा - २ (अभेद विवक्षा) और २० (भेद विवक्षा)
004 - किस-किस मार्गणा में कौन-कौन सी प्ररूपणा अन्तर्भूत हो सकती है?
008 - गुणस्थान का लक्षण
009-010 - १४ गुणस्थान
011 - १४ गणुस्थानों में भाव (मोहनीय की अपेक्षा)
015 - मिथ्यात्व गुणस्थान (पहला)
017 - मिथ्याभाव को समझने के लिए उदाहरण
018 - मिथ्यादृष्टि के बाह्य चिह्न
019 - सासादन / सासन गुणस्थान (दूसरा)
020 - सासादन का उदाहरण
021 - मिश्र / सम्यग्मिथ्यात्व गुणस्थान (तीसरा)
025 - अविरत सम्यक्त्व (चौथा)
026 - अविरत सम्यक्त्व (चौथा)
027 - विपरीत अर्थ का श्रद्धान करने पर भी क्या कोई सम्यग्दृष्टि हो सकता है?
029 - देशविरत (पाँचवां)
030 - देशविरत (पाँचवां)
031 - देशविरत (पाँचवां)
032 - प्रमत्तविरत (छठा)
033 - प्रमत्तविरत (छठा)
034 - १५ प्रमाद
035 - प्रमाद के अन्य ५ प्रकार
036 - संख्या (भंग का जोड़) कैसे लाए
037 - प्रस्तार - प्रथम प्रकार
038 - प्रस्तार - द्वितीय प्रकार
039 - प्रथम प्रस्तार का परिवर्तन
040 - दूसरे प्रस्तार का परिवर्तन
041 - नष्ट लाने की विधि
042 - उद्दिष्ट लाने की विधि
043 - प्रथम प्रस्तार का गूढ़ यन्त्र
044 - दूसरे प्रस्तार का गूढ़ यंत्र
045 - अप्रमत्त विरत (सातवां)
046 - स्वस्थान अप्रमत्त विरत की विशषेता
047 - सातिशय अप्रमत्त विरत का स्वरूप
048 - तीन करण की विशषेता
050 - अपूर्वकरण गुणस्थान
जीवतत्त्वप्रदीपिका
!!
श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नम:
!!
श्रीमद्-नेमिचंद्र-आचार्यदेव-प्रणीत
श्री
गोम्मटसार-जीवकांड
मूल प्राकृत गाथा,
आभार :
जीवतत्त्वप्रदीपिका
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