टीका
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निगमन का स्वरूप
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प्रतिज्ञायास्तु निगमनम् ॥47॥
अन्वयार्थ :
[तु]
दूसरी ओर
[प्रतिज्ञायाः]
प्रतिज्ञा के उपसंहार
(दुहराने)
को
[निगमनम्]
निगमन कहते हैं।
Meaning :
Recapitulation of the proposition
(pratigyā)
is called the conclusion
(nigamana)
.
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