+ अनुमान के दो भेदों का स्पष्टीकरण -
स्वार्थपरार्थभेदात् ॥49॥
अन्वयार्थ : [स्वार्थपरार्थभेदात्] एक स्वार्थानुमान और दूसरा परार्थानुमान।
Meaning : The two kinds of inference (anumāna) are: 1) for-self (svārtha) and 2) for-other (parārtha).

  टीका