+ अविरुद्ध उत्तरचर अनुपलब्धि हेतु -
नोद्गाद् भरणि: मुहूर्तात्प्राक् तत एव ॥80॥
अन्वयार्थ : एक मुहूर्त पहले भरणि का उदय नहीं हुआ है क्योंकि उत्तरचर कृतिका का उदय नहीं पाया जाता ।

  टीका 

टीका :

एक मुहूर्त पहले भरणी का उदय नहीं हुआ है क्योंकि अभी कृतिका का उदय नहीं है। यहाँ पर भरणि के उदय के अविरुद्ध उत्तर चर कृतिका के उदय का अभाव, भरणि के उदय की भूतता के अभाव को सिद्ध करता है, इसलिए यह हेतु अविरुद्धोत्तरचरोपलब्धि हेतु है। विशेष : यहाँ पर सूत्र पठित ततः एव पद से कृतिका के उदय की अनुपलब्धि का अर्थ ग्रहण किया है ।