
टीका :
जैसे मेरुपर्वत आदिक होते हैं, इस प्रकार का वाक्य सुनने से सहज योग्यता के आश्रय से हेम आदि पर्वतों का ज्ञान होता है उसी प्रकार ही सभी जगह शब्द से पदार्थों का ज्ञान हो जाता है। इति तृतीयः परिच्छेदः समाप्त:
इस प्रकार तीसरा परिच्छेद पूर्ण हुआ)
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