+ ऊर्ध्वता सामान्य -
परापरविर्वतव्यापिद्रव्यमूर्ध्वता मृदिव स्थासादिषु ॥5॥
अन्वयार्थ : पूर्व और उत्तर पर्यायों में रहने वाले द्रव्य को ऊर्ध्वता सामान्य कहते हैं। जैसे - स्थास, कोश, कुशूल आदि में मिट्टी रहती है। यहाँ सामान्य पद की अनुवृत्ति है।

  टीका 

टीका :

परेऽपरे च ये विवर्तास्तेषु व्याप्नोति इति परापरविवर्तव्यापि । यहाँ पर द्वन्द्वगर्भा कर्मधारय समास है कि पर में और अपर में व्याप्य होकर रहने वाला परापर विवर्तव्यापि है और इसी तरह पूर्व और उत्तर पर्याय में व्यापकपने से होने पर द्रव्यपने का नाम ऊर्ध्वता सामान्य है। जैसे-स्थास, कोश, कुशूल आदि पर्यायों में व्यापकपना मिट्टी द्रव्य का है।

प्रश्न – वह वस्तु क्या है ?

उत्तर –
द्रव्य।

प्रश्न – वह द्रव्य कैसा है ?

उत्तर –
वह द्रव्य परापरविर्वतव्यापि इस विशेषण से विशिष्ट है।

प्रश्न – परापरविर्वतव्यापि इस पद का क्या अर्थ है ?

उत्तर –
पूर्वोत्तर कालवी या त्रिकालवर्ती पर्यार्यों का अनुयायी।