+ अकिञ्चित्कर हेत्वाभास -
सिद्धे प्रत्यक्षादिबाधिते च साध्ये हेतुरकिञ्चित्करः ॥35॥
अन्वयार्थ : साध्य के सिद्ध होने पर तथा प्रत्यक्षादि प्रमाणों से बाधित होने पर प्रयुक्त हेतु अकिञ्चित्कर हेत्वाभास कहलाता है।

  टीका 

टीका :

साध्य के सिद्ध होने पर तथा प्रत्यक्षादि प्रमाणों से बाधित होने पर हेतु कुछ भी नहीं कर सकता, इसलिए वह अकिञ्चित्कर हेत्वाभास कहा जाता है। विशेष : जब साध्य सिद्ध हो या प्रत्यक्षादि किसी प्रमाण से बाधित हो तब उसकी सिद्धि के लिए जो भी हेतु दिया जाए वह साध्य की कुछ भी सिद्धि नहीं करता है, इसलिए उसे अकिञ्चित्कर कहते हैं।