+ अन्वय दृष्टान्ताभास की पुष्टि -
विद्युदादिनाऽति प्रसङ्गेत् ॥43॥
अन्वयार्थ : क्योंकि इसमें बिजली आदि से अतिप्रसंग दोष आता है।

  टीका 

टीका :

उल्टी अन्वय व्याप्ति दिखलाने से बिजली आदि के अतिप्रसङ्ग होता है, अर्थात् बिजली आदि अपौरुषेय है, इसलिए अमूर्त होना चाहिए। परन्तु वह अपौरुषेय होती हुई मूर्तिक है, इसलिए यहाँ पर विपरीत अन्वयव्याप्ति दिखलाने से अन्वयदृष्टान्ताभास जानना चाहिए।