+ विषयाभास -
विषयाभासः सामान्यं विशेषो द्वयं वा स्वतन्त्रम् ॥61॥
अन्वयार्थ : केवलसामान्य को, केवल विशेष को अथवा स्वतंत्र दोनों को प्रमाण का विषय मानना विषयाभास है।

  टीका 

टीका :

सामान्यमात्र को, विशेषमात्र को, अथवा दोनों रूप पदार्थ को स्वतंत्र रूप से एक-एक को प्रमाण का विषय रूप से स्वीकार करने वाला प्रमाण विषयाभास कहा जाता है।

विशेषार्थ : सांख्य सामान्य मात्र (द्रव्य) को ही प्रमाण मानता है। बौद्ध विशेष रूप केवल (पर्याय) को ही प्रमाण का विषय कहते हैं। नैयायिक और वैशेषिक सामान्य विशेषात्मक हैं, यह पहले ही सिद्ध किया जा चुका है।