जेज विणा लोगस्स वि ववहारो सव्वहा ण णिव्वडइ ।
तस्स भुवणेक्कगुरुणो णमो अणेगंतवायस्स ॥६९॥
भद्दं मिच्छादंसण समूहमहयस्स अमयसारस्स ।
जिणवयणस्स भगवओ संविग्गसुहाहिगम्मस्स ॥७०॥
अन्वयार्थ : [जेण विणा] जिसके बिना [लोगस्स] लोक का [ववहारो ] व्यवहार [वि] भी [सव्वहा] सर्वथा [ण] नहीं [णिव्वडइ] निष्पन्न होता है [तस्स] उस [भुवणेक्कगुरुणो] तीन लोक के अद्वितीय गुरु [अणेगंतवायस्स] अनेकान्तवाद को [णमो] नमस्कार है।
[मिच्छादंसण] मिथ्यादर्शन (मिथ्यामत वाले) [समूह] समुदाय (वर्ग) का [महयस्स] विनाश करने वाले [अमय सारस्स] अमृत सार (रूप) [संविग्ग] ममुक्षु के [सूहाहिगम्मस्स] सुख पूर्वक समझ में आने वाले [भगवओ] भगवान के [जिणवयणस्स] जिन वचन के [भद्द] कल्याण हो ।
Meaning : Be good to Jainism which is the repository of all heresies and which is nectar of nectars and which is easily understood by those desirous of liberation.

  विशेष