टीका
3-74 - अविरुद्धानुपलब्धि के भेद
3-75 - अविरुद्धस्वभावानुपलब्धि का उदाहरण
3-76 - अविरुद्धव्यापकानुपलब्धि हेतु
3-77 - अविरुद्ध कार्यानुपलब्धि हेतु
3-78 - अविरुद्ध कारणानुपलब्धि हेतु
3-79 - अविरुद्धपूर्वचरानुपलब्धि हेतु
3-80 - अविरुद्ध उत्तरचर अनुपलब्धि हेतु
3-81 - अविरुद्धसहचरोपलब्धि
3-83 - विरुद्धकार्यानुपलब्धि हेतु का उदाहरण
3-84 - विरुद्धकारणानुपलब्धि हेतु
3-85 - विरुद्धस्वभावानुपलब्धि रूप हेतु का उदाहरण
3-87 - पूर्वानुक्त हेतु का प्रथमोदाहरण
3-88 - उक्त हेतु की क्या संज्ञा है?
3-89 - परम्परा हेतु का दूसरा दृष्टान्त
3-90 - व्युत्पन्नपुरुषों के प्रति अनुमान के अवयवों के प्रयोग का नियम
3-91 - व्युत्पन्न प्रयोग की उदाहरण द्वारा पुष्टि
3-92 - उदाहरणादि के बिना व्याप्ति के नि}चयाभाव की आशंका का निराकरण
3-93 - दृष्टान्तादिक साध्य की सिद्धि के लिए फलवान नहीं
3-94 - पक्ष का प्रयोग सफल है
3-95 - आगम का स्वरूप
3-96 - शब्द से वास्तविक अर्थबोध होने का कारण
3-97 - शब्दार्थ से अर्थ अवबोध होने का दृष्टान्त
4-01 - प्रमाण का विषय
4-02 - अनेकान्तात्मक वस्तु के समर्थन के लिए दो हेतु
4-04 - तिर्यक् सामान्य
4-05 - ऊर्ध्वता सामान्य
4-08 - पर्याय विशेष
4-09 - विशेष का दूसरा भेद
5-01 - प्रमाण का फल
5-03 - कथञ्चित् अभेद का समर्थन
6-01 - प्रमाणाभास
6-02 - स्वरूपाभास
6-04 - दृष्टान्त
6-05 - सन्निकर्षवादी के प्रति दूसरा दृष्टान्त
6-06 - प्रत्यक्षाभास
6-07 - परोक्षाभास
6-08 - स्मरणाभास
6-09 - प्रत्यभिज्ञानाभास
6-10 - तर्काभास
6-11 - अनुमानाभास
6-13 - अनिष्टपक्षाभास
6-14 - सिद्धपक्षाभास
6-16 - प्रत्यक्षबाधित
6-17 - अनुमानबाधितपक्षाभास
6-18 - आगमबाधितपक्षाभास
6-19 - लोकबाधितपक्षाभास
6-20 - स्ववचनबाधितपक्षाभास
6-22 - असिद्ध हेत्वाभास
6-23 - स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास
6-24 - इस हेतु के असिद्धपना कैसा?
6-25 - असिद्ध हेत्वाभास का दूसरा भेद
6-26 - इस हेतु की भी असिद्धता कैसे ?
6-27 - असिद्धहेत्वाभास का और भी दृष्टान्त
6-28 - इस हेतु की असिद्धता में कारण
6-29 - विरुद्ध हेत्वाभास
6-30 - अनैकान्तिक हेत्वाभास
6-31 - निश्चित विपक्षवृत्ति का उदाहरण
6-32 - प्रमेयत्व हेतु की भी विपक्ष में वृत्ति कैसे निश्चित है?
6-33 - शंकित विपक्षवृत्ति अनैकान्तिक हेत्वाभास
6-34 - इस वक्तत्व हेतु का भी विपक्ष में रहना कैसे शंकित है?
6-35 - अकिञ्चित्कर हेत्वाभास
6-36 - सिद्धसाध्य अकिञ्चित्कर हेत्वाभास
6-37 - शब्दत्व हेतु के अकिञ्चित्करता कैसे
6-38 - शब्दत्वहेतु के अकिञ्चित्करत्व की पुष्टि
6-39 - अकिञ्चित्कर हेत्वाभास के प्रयोग की उपयोगिता
6-41 - अन्वयदृष्टान्ताभास के भेद
6-42 - अन्वय दृष्टान्ताभास का उदाहरणान्तर
6-43 - अन्वय दृष्टान्ताभास की पुष्टि
6-44 - व्यतिरेक उदाहरणाभास
6-45 - व्यतिरेक दृष्टान्ताभास का उदाहरणान्तर
6-46 - बालप्रयोगाभास
6-47 - बालप्रयोगाभास का उदाहरण
6-48 - चार अवयवों के प्रयोग करने पर तदाभासता
6-49 - अवयवों के विपरीत प्रयोग करने पर भी प्रयोगाभास
6-50 - अवयवों के विपरीत प्रयोग करने पर प्रयोगाभास कैसे?
6-51 - आगमाभास
6-52 - आगमाभास का उदाहरण
6-53 - आगमाभास का दूसरा उदाहरण
6-54 - दोनों वाक्यों में आगमाभासपना कैसे?
6-55 - संख्याभास
6-56 - यह संख्याभास कैसे?
6-57 - बौद्धादि के मत में भी संख्याभासपना
6-58 - अन्य अनुमानादिक से प्रमाण हो जायेगा?
6-59 - इसी विषय में उदाहरण
6-61 - विषयाभास
6-62 - सांख्यादिकों की मान्यताएँ विषयाभास
6-66 - फलाभास
6-67 - सर्वथा अभिन्न पक्ष में फलाभास
6-68 - कल्पना से प्रमाण और फल का व्यवहार करने में आपत्ति
6-69 - अभेद पक्ष में दृष्टान्त
6-70 - उपसंहार
6-71 - सर्वथा भेदपक्ष में दूषण
6-72 - प्रमाण और फल को समवाय सम्बन्ध मानने में दोष
6-73 - अपने पक्ष के साधन और परपक्ष के दूषण व्यवस्था
6-74 - संभवदन्यद्विचारणीयम् ॥74॥
टीका
!!
श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नम:
!!
आचार्य माणिक्यनंदि-देव-विरचित
श्री
परीक्षामुख
मूल संस्कृत सूत्र
टीका
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