विशेष
2-10-14 - सर्वज्ञ सामान्य-विशेष रूप पदार्थों का ज्ञाता
2-15 - क्रमोपयोगवादी का कथन
2-16-17 - ज्ञान का विषय पदार्थ
2-18 - सामर्थ्य के अनुसार सूत्रों की व्याख्या
2-19 - मन:पर्यय ज्ञान ही है दर्शन नहीं
2-20 - केवलदर्शन, केवलज्ञान कहने का तात्पर्य
2-21-22 - केवलदर्शन और केवलज्ञान में अन्तर क्या ?
2-23-24 - मतिज्ञान ही दर्शन
2-25 - आगम में चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन क्यों?
2-26 - मन:पर्यय ज्ञान में मन:पर्यय दर्शन का प्रसंग नहीं
2-27 - अल्पज्ञ का पदार्थ-ज्ञान दर्शनपूर्वक
2-28 - श्रुतज्ञान में दर्शन शब्द लागू नहीं
2-29 - अवधिज्ञान में दर्शन शब्द का प्रयोग उपयुक्त
2-30 - केवली के भेदविहीन ज्ञान, दर्शन
2-43 - केवलज्ञान : असंख्यात और अनन्त भी
3-07 - एक ही पुरुष में भेदाभेद
3-08 - क्या द्रव्य और गुण में भेद है?
3-20 - अभेदवादी का कथन
3-21 - सिद्धान्ती का तर्क
3-22 - प्रश्नोत्तर
3-23-24 - उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य लक्षण-विचार
3-25-26 - प्रस्तुत वार्ता का प्रयोजन
3-35-37 - उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य भिन्न तथा अभिन्न भी
3-43-45 - धर्मवाद
3-50-52 - वे सभी सदोष
3-53 - कार्य की उत्पत्ति स्व-कारण से
3-56-59 - अनेकान्त-दृष्टि के अभाव में
3-60 - पदार्थ के प्रतिपादन का क्रम
3-61-62 - अनेकान्ती ही भावस्पर्शी
3-63 - भक्ति या जानकारी मात्र से ज्ञानी नहीं
3-64-65 - अर्थ-ज्ञान दुर्लभ है
3-66-67 - ज्ञान-विहीन पर-समय
विशेष
!!
श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नम:
!!
आचार्य सिद्धसेन-देव-विरचित
श्री
सन्मतितर्क
मूल प्राकृत सूत्र
विशेष
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