कलावंत कोविद कुसल, सुमन दच्छ धीमंत ।
ज्ञाता सज्जन ब्रह्मविद, तज्ञ गुनीजन संत ॥४५॥
अन्वयार्थ : कलावंत कोविद कुसल, सुमन दच्छ धीमंत ।
ज्ञाता सज्जन ब्रह्मविद, तज्ञ गुनीजन संत ॥४५॥