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देह-जीव भिन्नता का दृष्टांत
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(दोहरा)
ज्यौं घट कहिये घीवकौ, घटकौ रूप न घीव ।
त्यौं वरनादिक नामसौं, जड़ता, लहै न जीव ॥९॥