इन्द्रियप्राणश्च तथा बलप्राणस्तथा चायुःप्राणश्च । आनपानप्राणो जीवानां भवन्ति प्राणास्ते ॥१४६॥
इन्द्रिय बल अर आयु श्वासोच्छ्वास ये ही जीव के हैं प्राण इनसे लोक में सब जीव जीवे भव भ्रमे ॥१५७॥
अन्वयार्थ : [इन्द्रिय प्राण: च] इन्द्रिय प्राण, [तथा बलप्राण:] बलप्राण, [तथा च आयुःप्राण:] आयुप्राण [च] और [आनपानप्राण:] श्वासोच्छ्वास प्राण; [ते] ये (चार)[जीवानां] जीवों के [प्राणा:] प्राण [भवन्ति] हैं ।
Meaning : The life-essentials (prāna) of the substance of soul (jīva) are the (five) sense-life-essentials (indriya-prāna), the (three) strengthlife- essentials (bala-prāna), the age-life-essential (āyu-prāna), and the respiration-life-essential (svāsochhvāsa-prāna).
अतीन्द्रिय- अनन्त सुख स्वभावी आत्मा से विलक्षण इन्द्रिय-प्राण,
मन, वचन और शरीर के व्यापार से रहित परमात्मद्रव्य से विसदृश (भिन्न)बल प्राण;
अनादि-अनन्त स्वभावी परमात्म-पदार्थ से विपरीत सादि-सान्त आयु-प्राण और
उच्छ्वास-निश्वास--स्वासोच्छवास से उत्पन्न खेद से रहित शुद्धात्मतत्त्व से विरुद्ध आनपान-स्वासोच्छवास प्राण
इसप्रकार अभेद नय से आयु, इन्द्रिय, बल और स्वासोच्छ्वास रूप से चार प्राण जीवों के होते हैं । और वे शुद्ध नय से जीव से भिन्न है - ऐसी भावना करना चाहिये ॥१५७॥