+ मैं ही परमात्मा -
जो परमप्पा णाणमउ सो हउँ देउ अणंतु ।
जो हउँ सो परमप्पु परु एहउ भावि णिभंतु ॥175॥
यः परमात्मा ज्ञानमयः स अहं देवः अनन्तः ।
यः अहं स परमात्मा परः इत्थं भावय निर्भ्रान्तः ॥१७५॥
अन्वयार्थ : [यः परमात्मा] जो परमात्मा [ज्ञानमयः] ज्ञानस्वरूप है, [स अहं] वह मैं हूँ, [अनंत देवः] अविनाशी देव-स्वरूप हूँ, [य अहं] जो मैं हूँ [स परः परमात्मा] वही उत्कृष्ट परमात्मा है [इत्थं निर्भ्रांतः भावय] इसप्रकार निस्संदेह भावना कर ।
Meaning : Parmatman who is Jnana-Maee (embodiment of knowledge or knowledge itself) is Ananta Deva (Infinite God); do thou realize that Parmatman within thyself.

  श्रीब्रह्मदेव