
एहु जु अप्पा सो परमप्पा कम्म-विसेसेँ जायउ जप्पा ।
जामइँ जाणइ अप्पें अप्पा तामइँ सो जि देउ परमप्पा ॥174॥
एष यः आत्मा स परमात्मा कर्मविशेषेण जातः जाप्यः ।
यदा जानाति आत्मना आत्मानं तदा स एव देवः परमात्मा ॥१७४॥
अन्वयार्थ : [एष यः आत्मा] यह जो आत्मा है [स परमात्मा] वही परमात्मा है, [कर्मविशेषेण] अनादि कर्म-बंध के विशेष से [जाप्यः जातः] पराधीन हुआ दूसरे का जाप करता है; परंतु [यदा] जब [आत्मना] आत्मा से [आत्मानं] अपने को [जानाति] जानता है, [तदा] तब [स एव] वह ही [परमात्मा] परमात्मा है ।
Meaning : What is Atman is Parmatman ; this Auman being under the influence of Karmas is Paradhin , but when it knows the true nature of self, then it becomes Parama-Deva .
श्रीब्रह्मदेव