
जो जिणु केवलणाणमउ परमाणंदसहाउ ।
सो परमप्पउ परमपरु सो जिय अप्पसहाउ ॥197॥
यः जिनः केवलज्ञानमयः परमानन्दस्वभावः ।
सः परमात्मा परमपरः स जीव आत्मस्वभावः ॥१९७॥
अन्वयार्थ : [यः जिनः] जो जिन [केवलज्ञानमयः] केवलज्ञानादि अनंत गुणमयी है [परमानंदस्वभावः] और परमानंद ही जिसका स्वभाव है, [सः परमात्मा] वही परमात्मा है; [जीव] हे जीव, वही [परमपरः] संसारियों में उत्कृष्ट है [स आत्मस्वभावः] वह आत्मा का ही स्वभाव है ।
Meaning : The Jina is Parama Nanda and Kewala Jnina Svabhava . This same highest and supreme status--that of a Jina--is the Svabhava of every Jiva .
श्रीब्रह्मदेव