
केवल-दंसणु णाणु सुहु वीरिउ जो जि अणंतु ।
सो जिणदेउ वि परममुणि परमपयासु मुणंतु ॥199॥
केवलदर्शनं ज्ञानं सुखं वीर्यं य एव अनन्तम् ।
स जिनदेवोऽपि परममुनिः परमप्रकाशं मन्यमानः ॥१९९॥
अन्वयार्थ : [केवलदर्शनं ज्ञानं सुखं वीर्यं] केवलदर्शन, केवलज्ञान, अनंतसुख, अनंतवीर्य [यदेव अनंतम्] ये अनंतचतुष्टय जिसके हों [स जिनदेवः] वही जिनदेव है, [परममुनिः] वही परममुनि [परमप्रकाशं जानन्] परमप्रकाश है ।
Meaning : The Jina Deva who possesses the four-fold infinite attributes, that is Kewala Darshana , Kewala Jnana Ananta Sukha and Ananta Virya , is the Parama Muni and the same is also Parmatma Prakasha, that is the revealer of the glory of God .
श्रीब्रह्मदेव