
जम्मण-मरण-विवज्जियउ चउ-गइ-दुक्ख विमुक्कु ।
केवल-दंसण-णाणमउ णंदइ तित्थु जि मुक्कु ॥203॥
जन्ममरणविवर्जितः चतुर्गतिदुःखविमुक्त: ।
केवलदर्शनज्ञानमयः नन्दति तत्रैव मुक्त: ॥२०३॥
अन्वयार्थ : [जन्ममरणविवर्जितः] जन्म-मरण से रहित, [चतुर्गतिदुःखविमुक्तः] चारों गतियों के दुःखों से रहित, [केवलदर्शनज्ञानमयः] और केवलदर्शन केवलज्ञानमयी, [मुक्तः] कर्म रहित हुए [तत्रैव] उसी में [नंदति] आनंदरूप विराजते हैं ।
Meaning : Those Munis who with pure thoughts meditate upon this Parmatma Prakasha and who have conquered Moha Karma ,such Munis alone understand the Parmatma Pada .
श्रीब्रह्मदेव