
शरीर-योगत: सन्ति वर्ण-गन्ध-रसादय: ।
स्फटिकस्येव शुद्धस्य रक्त-पुष्पादि-योगत: ॥54॥
अन्वयार्थ : रक्त-पुष्पादियोगतः शुद्धस्य स्फटिकस्य इव वर्ण-गन्ध-रसादयः शरीरयोगतः सन्ति ।
जैसे शुद्ध अर्थात् श्वेत स्फटिक मणि के लाल आदि पुष्पों के संयोग से लाल आदि रंग देखे जाते हैं; वैसे शरीर के संयोग से शुद्धात्मा के वर्ण, गंध, रस आदि कहे जाते हैं ।