
एवं संपद्यते दोष: सर्वथापि दुरुत्तर: ।
चेतनाचेतनद्रव्यविशेषाभावलक्षण: ॥89॥
अन्वयार्थ : एवं चेतन-अचेतन-द्रव्यविशेष-अभावलक्षण: दोष: अपि संपद्यते सर्वथा दुरुत्तर: ।
इसप्रकार चेतन और अचेतन द्रव्य में कोई भेद न रहनेरूप दोष उपस्थित होता है, जो किसी तरह भी टाला नहीं जा सकता ।