
नान्योन्य-गुण-कर्तृत्वं विद्यते जीव-कर्मणो: ।
अन्योन्यापेक्षयोत्पत्ति: परिणामस्य केवलम् ॥133॥
अन्वयार्थ : जीव-कर्मणो: अन्योन्य-गुण-कर्तृत्वं न विद्यते । अन्योन्यापेक्षया केवलं परिणामस्य उत्पत्ति: ।
जीव और आठ प्रकार के कर्म में एक दूसरे के गुणों का कर्तापना विद्यमान नहीं है ; एक-दूसरे की अपेक्षा से केवल परिणाम की ही उत्पत्ति होती है ।