+ करने-कराने का भाव कर्मोदयजन्य - -
सहकारितया द्रव्यमन्येनान्यद् विधीयते ।
क्रियमाणोऽन्यथा सर्व: संकल्प: कर्म-बन्धज: ॥163॥
अन्वयार्थ : सहकारितया द्रव्यं अन्येन अन्यत् विधीयते ।अन्यथा क्रियमाण: सर्व: संकल्प: कर्म-बन्धज: (भवति)
सरलार्थ :- सहकारिता अर्थात् निमित्त की दृष्टि से देखा जाय तो एक द्रव्य दूसरे द्रव्य से अन्यरूप में किया जाता है । अन्यथा करने-करानेरूप जो संकल्प है, वह सब कर्मबन्ध से उत्पन्न होता है अर्थात् कर्म के उदयजन्य है; उसमें जीव का कुछ कर्तापना नहीं है ।