+ चारित्रादि की मलिनता में हेतु मिथ्यात्व - -
चारित्रं दर्शनं ज्ञानं मिथ्यात्वेन मलीमसम् ।
कर्पटं कर्देनेव क्रियते निज-संगत: ॥164॥
अन्वयार्थ : कर्देन कर्पटं इव चारित्रं दर्शनं ज्ञानं मिथ्यात्वेन निज-संगतः मलीमसं क्रियते ।
जिसप्रकार कपड़ा कीचड़ के साथ स्वयं संपर्क करने से मैला हो जाता है; उसीप्रकार मिथ्यात्व के साथ स्वयं संगति करने से चारित्र, दर्शन/श्रद्धा और ज्ञान मिथ्या हो जाते हैं ।