
तत्त्वतो यदि जायन्ते तस्य ते न तदा भिदा ।
दृश्यते, दृश्यते चासौ ततस्तस्य न ते मता: ॥211॥
अन्वयार्थ : तत्त्वत: यदि ते तस्य जायन्ते, तदा भिदा न दृश्यते । दृश्यते च असौ, तत: ते तस्य न मता: ।
यदि तत्त्वदृष्टि से अर्थात् निश्चयनय से ये सब शरीर, इन्द्रिय आदि आत्मा के हैं, ऐसा माना जाये तो आत्मा और शरीर आदि में भेद दिखाई नहीं देना चाहिए; परन्तु इनमें भेद तो प्रत्यक्ष दिखाई देता है; इसलिए शरीरादि आत्मा के नहीं माने गये हैं ।