
कक्षा-श्रोणि-स्तनाद्येषु देह-देशेषु जायते ।
उत्पत्तिः सूक्ष्म-जीवानां यतो, नो संयमस्ततः ॥405॥
अन्वयार्थ : यत: कक्षा-श्रोणि-स्तनाद्येषु देह-देशेषु सूक्ष्म-जीवानां उत्पत्ति: जायते, तत: संयम: न: ।
क्योंकि स्त्रियों के कांख, योनि, स्तनादिक शरीर के अंग-उपांगों में सूक्ष्म जीवों की बहुत उत्पत्ति होती है, इसलिए उनके सकल संयम नहीं बनता ।