
आहारमुपधिं शय्यां देशं कालं बलं श्रमम् ।
वर्तते यदि विज्ञाय 'स्वल्पलेपो' यतिस्तदा ॥422॥
अन्वयार्थ : यदि यति: आहारं उपधिं शय्यां देशं कालं बलं श्रमं विज्ञाय वर्तते, तदा स्वल्पलेप: ।
यदि यति/मुनिराज आहार, परिग्रह, देश, काल, बल और श्रम को भले प्रकार जानकर प्रवृत्त होते हैं तो वे अल्पलेपी होते हैं अर्थात् मुनिराज को थोड़े कर्म का बंध होता है ।