+ बुद्धिपूर्वक कार्य का फल - -
बुद्धिपूर्वाणि कर्माणि समस्तानि तनूभृताम् ।
संसारफलदायीनि विपाकविरसत्वतः ॥440॥
अन्वयार्थ : तनूभृतां बुद्धिपूर्वाणि समस्तानि कर्माणि विपाकविरसत्वत: (भवन्ति । तत: तानि) संसारफलदायीनि (एव सन्ति)
बुद्धिपूर्वक कार्य अर्थात् इंद्रियों के निमित्त से होनेवाले सब कार्य फलकाल में विभावरूप से व्यक्त होते हैं; इसलिए देहधारी जीवों के वे सर्व कार्य संसार-फलदाता ही है ।