
ज्ञाते निर्वाण-तत्त्वेऽस्मिन्नसंमोहेन तत्त्वतः ।
मुमुक्षूणां न तद्युक्तौ विवाद उपपद्यते ॥448॥
अन्वयार्थ : तत्त्वत: असंमोहेन ज्ञाते अस्मिन् निर्वाण-तत्त्वे मुमुक्षूणां तद्युक्तौ विवाद: न उपपद्यते ।
मोक्षतत्त्व को असंमोहरूप से अर्थात् वीतरागतापूर्वक यथार्थरूप से जानने पर मुमुक्षुओं को मोक्षसंबंधी युक्तियों के कथन में विवाद नहीं हो सकता ।